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Islam

“अस्तग़फ़िरुल्लाह” का पाठ: अल्लाह की शरण लेना

अस्तग़फ़ार (या इस्तिग़फ़ार) अल्लाह से क्षमा माँगने का कार्य है। अरबी शब्द “अस्तग़फ़िरुल्लाह” का अर्थ है “मैं अल्लाह से क्षमा चाहता हूँ।”

पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) अल-इंसान अल-कामिल थे, जो अब तक के सबसे गुणी इंसान हैं! फिर भी वह दिन में कई बार अल्लाह से माफ़ी मांगते थे । [1] ज़ाहिर है, अल्लाह से क्षमा माँगना एक ऐसी चीज़ है जिसे हमें नियमित रूप से करना चाहिए।

“अस्तग़फ़िरुल्लाह” पढ़ने का महत्व

सवाल यह है कि हम बार-बार अल्लाह से माफ़ी क्यों माँगे?

हम, मनुष्य के रूप में, अपूर्ण प्राणी हैं। हम ग़लतियाँ करते हैं और अक्सर भटक जाते हैं। कभी-कभी, हम ऐसी ग़लतियाँ करते हैं जिनके बारे में हमें पता भी नहीं चलता है! दूसरे समय में, अच्छा करने की पूरी कोशिश में, हम अंत में नुक़सान पहुँचा सकते हैं। इन सभी स्थितियों में क्षमा के लिए अल्लाह की ओर मुड़ना अच्छा है। वह परम क्षमाशील है और केवल उसकी सहायता से ही हम अपने दोषों को दूर कर सकते हैं।

आपकी सभी प्रार्थनाओं के सच होने के लिए क्षमा माँगना भी फ़ायदेमंद होता है। तफ़सीर अल-क़ुर्तुबी में उल्लेख किया गया है: [2]

अपने रब से क्षमा माँगों, निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील है। वह तुम्हारे लिए बहुत वर्षा भेजेगा। और अपने लिए माल और औलाद बढ़ाओ और अपने लिए बाग़ और नहरें पैदा करो।

पाँचवा क़लिमाह

पाँचवाँ क़लिमाह इस्तिग़फ़ार सुंदर शब्द प्रदान करता है जिससे क्षमा माँगी जाती है। अरबी पाठ इस प्रकार है:

पाँचवाँ कालिमा इस्तग़फ़ार

और हिंदी अनुवाद:

मैं अपने परवरदिगार (अल्लाह) से अपने तमाम गुनाहों कि माफ़ी मांगता हूँ जो मैंने जान-बूझकर किये या भूल कर किये, छिप कर किये या खुल्लम खुल्ला किये और तौबा करता हूँ उस गुनाह से, जो मैं जनता हूँ और उस गुनाह से जो मैं नहीं जानता। या अल्लाह बेशक़ तू ग़ैब कि बाते जानने वाला और ऐबों को छिपाने वाला है और गुनाहों को बख़्शने वाला है और अल्लाह के बग़ैर कोई ताक़त और कोशिश काम नहीं करती।

इमाम हनबल (रज़ि) और बेकर

एक बार इमाम अहमद इब्न हनबल (रज़ि) यात्रा कर रहे थे। आख़िरकार, वह एक क़स्बे के पास रुकें। उन्होंने अपनी पहचान किसी के सामने प्रकट नहीं की ताकि वह अनावश्यक ध्यान अपनी ओर आकर्षित न करें। क़स्बे में किसी को नहीं जानते हुए, वह रात बिताने के इरादें से स्थानीय मस्जिद में गये।

हालांकि, मस्ज़िद के केयरटेकर उन्हें पहचानने में नाकाम रहें। उन्होंने इमाम हनबल से मस्जिद के परिसर को खाली करने का अनुरोध किया। एक बेकर जिसकी दुकान मस्जिद से ज़्यादा दूर नहीं थी, ने इस दृश्य को देखा और इमाम के लिए खेद महसूस किया। उन्होंने इमाम हनबल को रात के लिए अपनी बेकरी में रहने के लिए आमंत्रित किया, जिसे इमाम ने स्वीकार किया।

निष्कर्ष

इस प्रकार, हम देख सकते हैं कि अस्तग़फ़िरुल्लाह के नियमित पाठ और अल्लाह से क्षमा मांगने के कई लाभ हैं। साथ ही, हमें पता होना चाहिए कि अल्लाह से क्षमा माँगना उसे बहुत भाता है। जैसा कि हज़रत अनस बिन मलिक (रज़ि.) ने रिवायत किया है: [3]

अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने कहा, “अल्लाह अपने दास के पश्चाताप से अधिक प्रसन्न होता है, जितना कि तुम में से कोई भी अपने ऊँट को पाकर प्रसन्न होता है, जिसे उसने रेगिस्तान में खो दिया था।”

नतीजतन, हमें जितनी बार संभव हो अल्लाह से क्षमा माँगनी चाहिए। हम पूर्ण प्राणी नहीं हैं, लेकिन अल्लाह की मदद से हम बेहतरी के लिए प्रयास कर सकते हैं। आइए हम सभी यथासंभव अस्तग़फ़िरुल्लाह का पाठ करने की आदत विकसित करने का प्रयास करें।

संदर्भ

  1. सहीह बुख़ारी खंड 8, पुस्तक 75, संख्या 39
  2. तफ़सीर अल-क़ुर्तुबी 18:301-302
  3. सहीह बुख़ारी खंड 8, पुस्तक 75, संख्या 321

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